|| मत पकड़ना तितलियाँ ||
(ग़ज़ल)मत पकड़ना तितलियाँ उड़जायेंगी
खुशबुओं की मस्तियाँ उड़जायेंगी
धूप जाड़े की खिलेगी फिर सनम
देखना कल बदलियाँ उड़जायेंगी
रात के माथे की नन्ही शबनमी
भोर खिलते बुँदकियाँ उड़जायेंगी
धीरे -धीरे बात बनती जायेगी
धीमे -धीमे दूरियाँ उड़ जायेंगी
उस हवा पछुआ में इतना ज़ोर है
बस्तियों की बस्तियाँ उड़ जायेंगी
सूखने देना न पानी झील का
प्यार की मुर्ग़ाबियाँ उड़ जायेंगी
ओढ ले कंबल किसी के फिक्र का
देखना कल सर्दियाँ उड़ जायेंगी
ऐ ' सुमन ' चमका ले अपने रूप को
सोच मत कल सुर्ख़ियाँ उड़ जायेंगी
- लक्ष्मी खन्ना ' सुमन'
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Contributed by: Laxmi Khanna Suman in WaaS / 05 July 2015
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