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Jul 5, 2015

मत पकड़ना तितलियाँ

|| मत पकड़ना तितलियाँ ||

(ग़ज़ल)

मत पकड़ना तितलियाँ उड़जायेंगी 
खुशबुओं की मस्तियाँ उड़जायेंगी 
धूप जाड़े की खिलेगी फिर सनम 
देखना कल बदलियाँ उड़जायेंगी 
रात के माथे की नन्ही शबनमी 
भोर खिलते बुँदकियाँ उड़जायेंगी
धीरे -धीरे बात बनती जायेगी 
धीमे -धीमे दूरियाँ उड़ जायेंगी 
उस हवा पछुआ में इतना ज़ोर है 
बस्तियों की बस्तियाँ उड़ जायेंगी 
सूखने देना न पानी झील का 
प्यार की मुर्ग़ाबियाँ उड़ जायेंगी 
ओढ ले कंबल किसी के फिक्र का 
देखना कल सर्दियाँ उड़ जायेंगी 
ऐ ' सुमन ' चमका ले अपने रूप को 
सोच मत कल सुर्ख़ियाँ उड़ जायेंगी 

- लक्ष्मी खन्ना ' सुमन'
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Contributed by: Laxmi Khanna Suman in WaaS / 05 July 2015

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