|| जिंदगी को जी ||
तू
जिंदगी को जी
उसे समझने की
कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के
ताने बाने बुन
उसमे उलझने की
कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ
तू भी चल
उसमे सिमटने की
कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला,
खुल कर साँस ले
अंदर ही अंदर घुटने की
कोशिश न कर
मन में चल रहे
युद्ध को विराम दे
खामख्वाह खुद से
लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते
भगवान् पर छोड़ दे
सब कुछ खुद सुलझाने की
कोशिश न कर
जो मिल गया
उसी में खुश रह
जो सकून छीन ले
वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का
लुत्फ़ उठा
मंजिल पर जल्दी
पहुचने की कोशिश न कर....
चलो कुछ पुराने दोस्तों के
दरवाज़े खटखटाते हैं
देखते हैं उनके पँख थक चुके है
या अभी भी फड़फड़ाते हैं
हँसते हैं खिलखिलाकर
या होंठ बंद कर मुस्कुराते हैं
वो बता देतें हैं सारी आपबीती
या सिर्फ सक्सेस स्टोरी सुनाते हैं
हमारा चेहरा देख
वो अपनेपन से मुस्कुराते हैं
या घड़ी की और देखकर
हमें जाने का वक़्त बताते हैं
चलो कुछ पुराने दोस्तों के दरवाजे खटखटाते है ||
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Contributed by: Shishir Kant Misra in WaaS / 11 April 2015
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